- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में कैदी बना रहे रोशनी: हत्या, रेप और गंभीर अपराध में सजा भुगत रहे अपराधी रोज बना रहे 200–300 LED बल्ब, दिल्ली और नासिक से आता कच्चा माल!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन की भैरवगढ़ सेंट्रल जेल इन दिनों एक नई मिसाल पेश कर रही है। जहां पहले कैदी केवल अपराध की सज़ा काटते दिखते थे, वहीं अब वही कैदी LED बल्ब और सजावटी सीरीज बनाकर अपनी जिंदगी को नई दिशा देने में जुटे हैं। हत्या, रेप और अन्य गंभीर अपराधों में सजा भुगत रहे कैदी अब अपराध की अंधेरी दुनिया से बाहर निकलकर समाज के लिए रोशनी तैयार कर रहे हैं।
रोजाना 200–300 बल्ब का उत्पादन
जेल प्रशासन और आईटीआई उज्जैन की साझेदारी से शुरू की गई इस पहल में कैदियों को इलेक्ट्रिकल कार्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आईटीआई से आए विशेषज्ञ कैदियों को बल्ब और सीरीज बनाने की ट्रेनिंग देते हैं। फिलहाल करीब 50 कैदी इस काम में दक्ष हो चुके हैं और रोजाना 200 से 300 LED बल्ब तैयार कर रहे हैं।
दिल्ली–नासिक से आता है कच्चा माल
इस प्रोजेक्ट के लिए बल्ब बनाने का कच्चा माल दिल्ली और नासिक से मंगवाया जाता है। खास बात यह है कि कैदी न सिर्फ बल्ब बना रहे हैं, बल्कि त्योहारों को ध्यान में रखते हुए सजावटी सीरीज भी तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होगा।
9 और 15 वॉट के बल्ब – कम लागत, ज्यादा फायदा
फिलहाल कैदी 9 वॉट और 15 वॉट के LED बल्ब तैयार कर रहे हैं। डिप्टी जेलर सुरेश गोयल के मुताबिक, ये बल्ब बाजार की तुलना में काफी कम लागत में बनते हैं। लागत पर करीब 30% प्रॉफिट मार्जिन रखकर इन्हें प्रदेश की अन्य जेलों—जैसे भोपाल और देवास—में सप्लाई किया जा रहा है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश की कई जेलें आज उन्हीं कैदियों द्वारा बनाए बल्बों से रोशन हो रही हैं।
आगे जनता तक पहुंचेगा उजाला
अभी ये बल्ब जेल परिसरों में ही उपयोग हो रहे हैं, लेकिन जेल प्रशासन की योजना है कि भविष्य में इन्हें भैरवगढ़ जेल की आउटलेट्स के माध्यम से आम जनता तक भी बेचा जाएगा। इससे कैदियों की बनाई प्रोडक्ट सीधे समाज तक पहुंच सकेगी।
यह पहल कैदियों के लिए केवल काम या कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है। जेल से बाहर आने के बाद यही हुनर उन्हें आत्मनिर्भर बना सकता है। कैदी जब सजा पूरी कर समाज में लौटेंगे तो वे अपने पैरों पर खड़े होकर अपने और अपने परिवार का जीवन सुधार पाएंगे।